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पूजास्थल पर नहीं रखना चाहिए मृत पूर्वजों के चित्र?

पूजास्थल पर नहीं रखना चाहिए मृत पूर्वजों के चित्र?

*🛕 वास्तु ज्ञानामृत 🛕* ~~~~~~~ हमारे हिन्दू धर्म में आस्था का बहुत ही ख़ास महत्व है, ऐसी कई बातें हैं जिनसे अनजान हैं लोग।  पूजा घर को सजाने के लिए…

*🛕 वास्तु ज्ञानामृत 🛕*


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हमारे हिन्दू धर्म में आस्था का बहुत ही ख़ास महत्व है, ऐसी कई बातें हैं जिनसे अनजान हैं लोग। 


पूजा घर को सजाने के लिए वे हर प्रकार की वस्तुओं का प्रयोग करते हैं, जो उनके हिसाब से तो सही होती हैं 


लेकिन शास्त्रों के अनुसार वे अशुभ हैं। हिन्दू परिवारों के अमूमन पूजा घरों में आप भगवान की मूर्तियों के अलावा कुछ तस्वीरें भी पाएंगे।


 तस्वीरें देवी-देवता के पास जो लोग संत-महात्मा पर विश्वास करते हैं, वे उनकी तस्वीर भी पूजा घर में लगाते हैं। व कुछ लोग अपने मृत पूर्वज या फिर परिजनों की तस्वीर भी पूजा घर में लगाते हैं।


ऐसा कभी ना करें.... 


शास्त्रों के अनुसार कभी भी पूजा घर में मृत हो चुके व्यक्ति की कोई भी वस्तु या तस्वीर तो बिलकुल भी नहीं होनी चाहिए।

यह शास्त्रों की दृष्टि में अशुभ है, 



इससे आपकी पूजा बेकार होती है कुछ लोग जो अपने मृत परिजनों को बेहद प्रेम करते हैं, वे उनके चले जाने के बाद उन्हें सम्मान देने हेतु मंदिर में उनकी तस्वीर लगाते हैं।


लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार भगवान के समान पूजा नही की जारी है जो सांसारिक मनुष्य है उनकी जीवित की सेवा पूजा की जाती है मृत्य के पच्यात ऐसा नहीं करना चाहिए व पूर्वजो की पूजा की प्रद्धति अलग है उन्हें देव पूजा के अनुसार नही की जाती ।


संत पुरुष महात्मा पूर्वज महान है उन्हें महापुरुष कहा जा सकता है भगवान नही भगवान केवल उस परम शक्ति का ही नाम है जिसका न जन्म है न अंत है 


इसलिए पूजा घर में अन्य मूर्तियों के साथ, वरन् पूजा घर की दीवारों पर भी मृत परिजनों की तस्वीर नहीं होनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से देवी-देवता रूष्ट हो जाते हैं।


वास्तु के अनुसार घर का पूजा स्थल हमें उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। यदि इसमें नहीं तो आप केवल पूर्व दिशा भी चुन सकते हैं, किंतु उत्तर-पूर्व दिशा पूजा घर के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। 


वास्तु शास्त्र में मर चुके परिवार के लोगों की तस्वीर कभी भी इन तीन दिशाओं में नहीं लगानी चाहिए।


मृत परिजनों की तस्वीरों को लगाने के लिए घर की दक्षिण, दक्षिण एवं उत्तर दिशा ही चुनी जानी चाहिए। यदि इसके अलावा किसी अन्य दिशा में मृत परिजनों की तस्वीर लगाई जाए तो यह घर में नकारात्मक ऊर्जा को लेकर आता है। 


जो सबसे पहले परिवार के लोगों की मानसिक अवस्था पर अटैक करता है।


अब जब पूजा स्थल उत्तर-पूर्व दिशा में विराजमान हो, तो यहां मृत परिजन की तस्वीर लगाना बिलकुल भी सही नहीं है। 


यह घर वालों के लिए ही नेगेटिव सिद्ध हो सकता है। लेकिन ना केवल वास्तु शास्त्र में वरन् देवी-देवता से जुड़ी मान्यताओं में भी देव-मूर्तियों के साथ परिवार के सदस्यों की तस्वीर लगाना गलत है।


कुछ लोग जो अपने माता-पिता या अपने से बड़ों से भगवान से भी अधिक प्रेम करते हैं, उन्हें मानते हैं, वे उनकी पूजा करना आरंभ कर देते हैं। उनकी तस्वीर को पूजा घर में स्थापित कर रोज़ाना उनकी पूजा करते हैं, लेकिन ऐसा करना ठीक नही उन्हें मानिए उनका सम्मान कीजिये लेकिन उस परम शक्ति का अपमान न करे 


जो भगवान के समान है पर भगवान नही है


ऐसा कहा गया है कि कोई भी आम मनुष्य़ देवी-देवताओं से ऊपर नहीं हो सकता। 


भगवान का स्थान हमेशा उच्च है और उच्चतम ही रहेगा। 


इसलिए उनकी बराबरी में ज़िंदा या फिर मर चुके परिवार के लोगों की तस्वीर रखकर पूजा नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से मनोकामना की पूर्ति कभी नहीं होती।


अतः पितृ की तस्वीर दक्षिण व संत महात्मा महापुरुष व गुरु उत्तर व पच्छिम में स्थापित करे 


ओर यदि पितृ की पूजा करना है तो पितृ पूजा के नियम की जानकारी अवश्य ही लेनी चाहिए


‼️ *शास्त्री कल्पेश जोशी रेवदर* ‼️

   आद्याशक्ति के परम उपासक व 

     ज्योतिष एवं वास्तु विद


(ज्योतिष अनुसंधान केंद्र द्वारा मान्यता प्राप्त ज्योतिष विद्या विशारद)

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